Dawood Ibrahim: Underworld don दाऊद इब्राहिम की कहानी Daud Ibrahim Real Story in Hindi | Dawood



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Dawood Ibrahim Smuggling Story in Hindi: दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) 70 के दशक से क्राइम की दुनिया में है। माफिया डॉन वह तब बना, जब साल 1975 में आपातकाल में जेल में बंद हुआ। जेल में उसकी मुलाकात हुई हाजी मस्तान और युसूफ पटेल से। दो साल बाद वह जेल से रिहा हुआ और फिर हाजी मस्तान के लिए तस्करी करने लगा। बाद में उसने ख़ुद का सिंडिकेट बनाया और अपना स्मगलिंग का बिजनेस बढ़ाने के लिए अलग-अलग जांच एजेंसियों के लोगों को खुश करने का फैसला किया। कस्टम के लोग उसके सबसे ज़्यादा दोस्त थे।
मुंबई पुलिस के एक भरोसेमंद अधिकारी ने बताया कि कस्टम के अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाने के लिए दाऊद एक लड़की का इस्तेमाल करता। उस लड़की तक दाऊद के लोग कैश पहुंचाते और बाद में वह लड़की कस्टम अधिकारियों तक रिश्वत लेकर जाती। चूंकि एक ख़ास लड़की ही नियमित तौर पर एक ख़ास कस्टम अधिकारी को दाऊद की रकम देती, इसलिए दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं।
बाद में दाऊद के आदेश या इच्छा पर दोनों ने शादी कर ली। कुछ साल बाद उस लड़की की मौत हो गई।
अंडरवर्ल्ड, कस्टम और लड़कियां – ड्रग्स तस्करी में इनका लिंक कई दशकों से है। अभी तो हवाला से रकम पहुंचा दी जाती है। किसी और के अकाउंट्स में डिजिटल ट्रांजैक्शन करके भी छोटे-बड़े अधिकारियों को ‘खुश’ किया जाता है, लेकिन किसी जमाने में सिर्फ कैश चलता था। साजिश पकड़ में ना आए, इसलिए हर माफिया डॉन लड़कियों के ज़रिये ही अफ़सरों तक रकम पहुंचाता।
लड़कियां सिर्फ रिश्वत देने का ही काम नहीं करतीं, बल्कि हथियार भी छिपाकर एक से दूसरे शहर या एक उपनगर से दूसरे उपनगर ले जातीं। अमूमन किसी लड़की/महिला को साथ में देखकर पुलिस वाले शक नहीं करते। कई अंडरवर्ल्ड सरगनाओं ने एनकाउंटर से बचने के लिए भी कई बार अपनी गर्लफ्रेंड या पत्नी को साथ में रखा।मुंबई पुलिस के इस अधिकारी के अनुसार, कस्टम वालों को ही ख़ास तौर सबसे ज़्यादा खुश करने की अंडरवर्ल्ड सरगनाओं की एक ख़ास वजह रही है। इन दिनों ड्रग्स की तस्करी सबसे अधिक होती है, लेकिन किसी जमाने में गोल्ड और सिल्वर ही मुंबई में सबसे ज़्यादा स्मगल किया जाता था। कस्टम वालों को पैसा मिल जाता और अंडरवर्ल्ड सरगनाओं का भी काम हो जाता। बाद में अंडरवर्ल्ड ने जिस रास्ते से गोल्ड और सिल्वर मंगवाया था, उसी रास्ते से हथियार और आरडीएक्स मंगाना शुरू कर दिया।1993 के मुंबई ब्लास्ट का उदाहरण सबसे सामने है। इस ब्लास्ट के साजिशकर्ताओं में से एक टाइगर मेमन के ख़िलाफ़ ख़ुद कस्टम विभाग ने कोफेपोसा का डिटेंशन ऑर्डर निकाला था, लेकिन कभी उसे पकड़ा नहीं। इसकी वजह यह थी कि कस्टम वालों ने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं था कि जिस स्मगलर से वह रिश्वत ले रहे हैं, वह मुंबई को दहलाने का भी काम कर सकता है।

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